वाराणसी: नगर निगम का दिखा “नो फ्यूल डे” अभियान: महापौर पैदल, नगर आयुक्त ई-स्कूटी से पहुंचे दफ्तर

रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी: स्वच्छ ऊर्जा और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर निगम ने एक नई और प्रेरणादायक पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने “नो फ्यूल डे” अभियान की शुरुआत की है। इस पहल के तहत प्रत्येक शनिवार को नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी पेट्रोल-डीजल वाहनों का कम से कम उपयोग करेंगे और इसके स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों, ई-रिक्शा, साइकिल या पैदल चलने जैसे वैकल्पिक साधनों को अपनाएंगे।

यह पहल न केवल ईंधन की बचत को प्रोत्साहित करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
महापौर और नगर आयुक्त ने दिया उदाहरण
इस अभियान की शुरुआत शनिवार को एक अनुकरणीय उदाहरण के साथ हुई। नगर निगम के महापौर अशोक तिवारी स्वयं पैदल चलकर अपने कार्यालय पहुंचे। उनके इस कदम ने नगर निगम के अन्य कर्मचारियों को भी प्रेरित किया।

इसी क्रम में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल इलेक्ट्रिक स्कूटी से कार्यालय पहुंचे। वहीं अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने ई-रिक्शा का उपयोग कर दफ्तर पहुंचकर इस पहल में सहभागिता दिखाई।

इन सभी वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि यदि नेतृत्व स्वयं बदलाव की पहल करे तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन तेजी से आता है।
प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रेरित पहल
महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान से प्रेरित है जिसमें उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

ऐसे में आवश्यक है कि हम सभी ऊर्जा संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वैकल्पिक साधनों को अपनाकर ईंधन पर निर्भरता कम करें।
हर शनिवार “नो फ्यूल डे” के रूप में मनाया जाएगा दिन
नगर निगम ने निर्णय लिया है कि अब हर शनिवार को “नो फ्यूल डे” के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन निगम के सभी अधिकारी और कर्मचारी प्रयास करेंगे कि वे पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहनों का उपयोग न करें, या न्यूनतम उपयोग करें।

इसके स्थान पर ई-वाहन, साइकिल, सार्वजनिक परिवहन और पैदल चलने जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि शहर में प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी
इस पहल में नगर निगम के कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई कर्मचारी ई-रिक्शा से आए, जबकि कुछ ने इलेक्ट्रिक स्कूटी और अन्य पर्यावरण अनुकूल साधनों का उपयोग किया।

इसके अलावा कुछ कर्मचारियों ने छोटी दूरी के लिए पैदल चलकर कार्यालय पहुंचने का निर्णय लिया। इस सामूहिक प्रयास ने पूरे नगर निगम परिसर में एक सकारात्मक माहौल बना दिया।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक उद्देश्य छिपा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शहरी क्षेत्रों में लोग छोटे-छोटे बदलाव करें, जैसे कि छोटी दूरी के लिए वाहन का कम उपयोग, तो इससे ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

साथ ही, वायु प्रदूषण में भी गिरावट देखने को मिलेगी, जिससे शहर का पर्यावरण अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बनेगा।
नागरिकों के लिए प्रेरणा
महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि यह अभियान केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य आम नागरिकों को भी प्रेरित करना है। उन्होंने अपील की कि लोग अपने दैनिक जीवन में छोटे बदलाव करें।

उदाहरण के लिए, यदि संभव हो तो लोग पैदल चलें, साइकिल का उपयोग करें या इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं। इससे न केवल व्यक्तिगत खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
भविष्य की योजना
नगर निगम ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक रूप दिया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सरकारी संस्थानों को भी इस पहल से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है।

वाराणसी नगर निगम का “नो फ्यूल डे” अभियान एक सकारात्मक और समयानुकूल पहल है, जो ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा दोनों को बढ़ावा देता है। महापौर, नगर आयुक्त और अन्य अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को एक मजबूत संदेश दिया है कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है।



