
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास, युवा सशक्तिकरण, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और उच्च शिक्षा के विस्तार से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कुल 22 प्रस्तावों पर मुहर लगाते हुए सरकार ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश में निवेश, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण निर्णय उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की संस्तुतियों को मंजूरी देना रहा। इसके तहत औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कंफर्ट (LoC), पूंजीगत सब्सिडी और परियोजनाओं में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति दी गई है। इससे उद्योगों की वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत होगी और संचालन में आ रही व्यावहारिक बाधाएं कम होंगी।
औद्योगिक इकाइयों को राहत, निवेश को मिलेगा बल
अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार के अनुसार, कैबिनेट ने छह नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, एक इकाई के सब्सिडी क्लेम और एक परियोजना के संशोधित एलओसी को मंजूरी दी है।

शाहजहांपुर स्थित ओएफसी टेक प्राइवेट लिमिटेड (₹589 करोड़) और हाथरस की एजेआई केन इंडस्ट्रीज (₹1128 करोड़) को एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए एलओसी जारी करने का निर्णय लिया गया है। वहीं गोरखपुर की इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड (₹669 करोड़), प्रयागराज की विस्कोस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (₹269 करोड़) तथा गौतमबुद्ध नगर की इंटीग्रेटेड बैटरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (₹1146 करोड़) को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, मुरादाबाद की त्रिवेणी इंजीनियरिंग को भी पूंजीगत सब्सिडी वितरण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही गौतमबुद्ध नगर स्थित आवादा इलेक्ट्रो लिमिटेड की ₹16,000 करोड़ की परियोजना में एलओसी संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी देकर क्रियान्वयन में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों को दूर करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
स्पष्ट है कि इन निर्णयों से औद्योगिक इकाइयों की लागत में कमी आएगी। परिणामस्वरूप उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
ग्रीन एनर्जी हब की दिशा में है कदम
बैठक में सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बड़े निवेश प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। इससे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रगति होगी।

दरअसल, सौर उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए इन परियोजनाओं से न केवल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उत्पादन को भी गति मिलेगी।
स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना को मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के लिए अंतिम बिड दस्तावेज को मंजूरी दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 2000 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जिसका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।

योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, तकनीकी एवं स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण, आईटीआई तथा सेवा मित्र पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं को मुफ्त टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे छात्रों को डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच मिलेगी।

वास्तव में, डिजिटल सशक्तिकरण आज की शिक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में यह योजना युवाओं को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और रोजगार अवसरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
विस्थापित परिवारों को मिलेगा भूमिधर अधिकार
कैबिनेट ने जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में विभाजन काल में आए विस्थापित परिवारों को भूमिधर अधिकार देने का फैसला किया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन को अध्यादेश के माध्यम से स्वीकृति प्रदान की गई है।

दशकों से स्वामित्व अधिकार के अभाव में ये परिवार बैंक ऋण लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। अब इस निर्णय के बाद उन्हें कानूनी मालिकाना हक मिलेगा। इससे न केवल आर्थिक सशक्तीकरण होगा, बल्कि सामाजिक सम्मान भी सुनिश्चित होगा।
99 हिन्दू बंगाली परिवारों का मिलेगा पुनर्वास
पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित 99 हिन्दू बंगाली परिवारों के पुनर्वास प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने कार्योत्तर अनुमोदन दिया है। मेरठ के मवाना क्षेत्र से संबंधित इन परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के ग्राम भैंसाया और ताजपुर तरसौली में बसाया जाएगा।

सरकार ने इनके लिए 1 लीज रेंट निर्धारित करते हुए पट्टा प्रारूप को मंजूरी दी है। इससे प्रभावित परिवारों को वैध आवासीय अधिकार मिलेंगे और पुनर्वास प्रक्रिया सुव्यवस्थित ढंग से पूरी हो सकेगी।
गोरखपुर में होगा वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय
कैबिनेट ने गोरखपुर में “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026” को स्वीकृति दी है। यह विश्वविद्यालय कैंपियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा।

प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और एग्रोफोरेस्ट्री जैसे विषयों में स्नातक से लेकर पीएचडी तक पाठ्यक्रम संचालित होंगे। इससे प्रदेश में हरित विकास, शोध और कृषि-आधारित नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
संतुलित विकास की दिशा में है कदम
समग्र रूप से देखें तो योगी कैबिनेट के ये निर्णय औद्योगिक प्रोत्साहन, डिजिटल सशक्तीकरण, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संतुलन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास हैं। एक ओर जहां उद्योगों को वित्तीय सहूलियत दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को तकनीकी संसाधन और विस्थापित परिवारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

आने वाले समय में इन फैसलों के प्रभाव का आकलन निवेश वृद्धि, रोजगार सृजन और सामाजिक सशक्तिकरण के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल, सरकार का यह कदम प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।



