कानपुर: पुलिस ने 24 घंटे में पकड़ा शातिर ठग, पुलिस को बताया झूठी लूट का झांसा, महिला भी बची

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: कानपुर पुलिस ने एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने न केवल पुलिस को 24 घंटे तक गुमराह किया बल्कि पूरे शहर में सनसनी फैला दी। आरोपी का नाम अंतिम सोनी है, जो मेरठ का निवासी है। इस घटना की पूरी कहानी किसी फिल्मी परिदृश्य से कम नहीं है। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसके साथ 38 लाख रुपये की लूट हुई है, जिसमें 30 लाख नकद और 8 लाख रुपये के जेवर शामिल थे।
जानिए कैसे हुई घटना की शुरुआत
घटना की शुरुआत हुई तब जब अंतिम सोनी ने पुलिस को सूचना दी कि अफीम कोटी चौराहे के पास उसके साथ लूट हुई है। पुलिस ने तुरंत ही मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस भी हैरान रह गई, क्योंकि जैसे-जैसे तथ्य सामने आए, स्पष्ट हुआ कि यह घटना पूरी तरह से ठगी का मामला है।

डीसीपी ने किया खुलासा
कानपुर पुलिस के डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने एक तालाब शुदा महिला को एक जाल में फंसाया और उसे सगाई के लिए अपने साथ कानपुर बुलाया। आरोपी ने महिला को दिखाया कि वह 30 लाख नकद और 8 लाख रुपये के जेवर के साथ आ रहा है, और उसी नकली लूट की कहानी गढ़ी। उसका मकसद महिला को भी ठगी का शिकार बनाना था।
संयुक्त टीम को मिली सफलता
हालांकि, जैसे ही पुलिस ने घटना की जांच शुरू की, स्वाट टीम, साइबर टीम और पुलिस सर्विलांस टीम ने मिलकर केवल 24 घंटे में इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया। इस दौरान पुलिस ने आरोपी की हर चाल पर नजर रखी और उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
अंतिम सोनी की चालाकी और पुलिस को चकमा देने की कोशिशों के बावजूद, कानपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न केवल महिला की सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि उसके द्वारा बताए गए झूठे लुटेरे के नाम और हुलिए की सच्चाई भी उजागर की।

डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि आरोपी ने महिला के दो पुत्रों को भी डराने और भ्रमित करने की कोशिश की थी। इसके लिए उसने उन्हें लुटेरों के रूप में पेश किया। लेकिन पुलिस की तत्परता और टीम वर्क ने इस योजना को विफल कर दिया।
पुलिस टीम की हो रही सराहना
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई ने यह साबित किया कि तकनीक और सतर्कता के माध्यम से कोई भी अपराध न केवल जल्दी पकड़ा जा सकता है बल्कि निर्दोष लोगों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
लोगों का कहना है कि ऐसे मामले समाज में बढ़ती साइबर ठगी और धोखाधड़ी के खतरे को उजागर करते हैं। अगर लोग सतर्क रहें और अपनी व्यक्तिगत जानकारियों को ऑनलाइन सुरक्षित रखें तो इस तरह के अपराधों से बचा जा सकता है।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि अपराधी कितने शातिर और योजनाबद्ध तरीके से लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। लेकिन पुलिस की तत्परता, तकनीकी सहयोग और टीम वर्क ने इस पूरे मामले को मात्र एक दिन में सुलझा दिया।
इस पूरे प्रकरण में कानपुर पुलिस की सक्रियता, जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और टीम वर्क की कुशलता की सराहना की जा रही है। डीसीपी सेंट्रल ने भी यह संदेश दिया कि कानपुर पुलिस हर नागरिक की सुरक्षा के लिए तत्पर है और किसी भी प्रकार की ठगी या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं करेगी।



