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हरदोई: गंगा घाट पर हुआ बड़ा हादसा – कलश यात्रा के दौरान नदी में समां गए 5 किशोर – एक की मौत, एक लापता

रिपोर्ट – गुलफाम खान 

हरदोई: जिले में गंगा घाट पर एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के नोखेपुरवा गांव के पास गंगा नदी से कलश में जल भरने के दौरान पांच किशोर-किशोरियां डूब गए। स्थानीय लोगों और गोताखोरों की तत्परता से चार को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन एक किशोरी की मौत हो गई, जबकि एक किशोर अब भी लापता है। प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और खोज अभियान में जुटी हैं।

श्रीमद्भागवत कथा से पहले निकली थी कलश यात्रा

जानकारी के अनुसार, म्योरा मोड़ स्थित मंदिर पर श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ बृहस्पतिवार को होना था। इसके लिए श्रद्धालुओं द्वारा परंपरागत कलश यात्रा निकाली गई थी। गांव के लोग पिकअप वाहन से गंगा घाट पहुंचे थे, जहां से कलश में जल भरकर वापस लौटना था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जल भरने के दौरान अचानक पैर फिसलने से पांच किशोर-किशोरियां गंगा नदी के एक गहरे कुंड में चले गए। देखते ही देखते स्थिति गंभीर हो गई और मौके पर अफरातफरी मच गई। हालांकि, आसपास मौजूद महिलाओं और ग्रामीणों ने तत्काल शोर मचाकर सहायता के लिए लोगों को बुलाया।

स्थानीय लोगों की तत्परता से बची तीन जानें

घटना की सूचना मिलते ही नोखे पुरवा गांव के कई लोग नदी में कूद पड़े। स्थानीय गोताखोरों की मदद से पांच में से चार बच्चों को बाहर निकाल लिया गया। इनमें से एक किशोरी को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

दूसरी ओर, एक किशोर अब भी लापता है। प्रशासन और स्थानीय गोताखोर उसकी तलाश में जुटे हैं। हालांकि, रात होने के कारण खोज अभियान में कुछ कठिनाइयां आ रही हैं।

प्रशासन पहुंचा था मौके पर, तलाश की गई शुरू 

घटना की जानकारी मिलते ही बिलग्राम उपजिलाधिकारी (एसडीएम) एन. राम मौके पर पहुंचे। उनके अनुसार, राजस्व टीम और पुलिस बल के साथ खोज एवं राहत कार्य जारी है। स्थानीय गोताखोरों को लगाया गया है और आवश्यकता पड़ने पर एसडीआरएफ या पीएसी की सहायता भी ली जा सकती है।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि लापता किशोर की तलाश हर संभव संसाधनों के साथ की जाएगी। साथ ही, परिजनों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

गांव में है शोक का माहौल

इस हादसे के बाद म्योरा मोड़ और नोखेपुरवा गांव में शोक की लहर है। श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ से पहले हुए इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। परिवारों में मातम पसरा हुआ है और ग्रामीणों की आंखें नम हैं।

हालांकि, ग्रामीणों ने राहत कार्य में प्रशासन के साथ सहयोग भी किया। लोगों का कहना है कि यदि तुरंत प्रयास न किए जाते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है। अक्सर धार्मिक आयोजनों या पर्वों के दौरान बड़ी संख्या में लोग गंगा घाटों पर पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गहरे कुंडों और फिसलन वाले स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग होनी चाहिए। इसके अलावा, बड़े आयोजनों के दौरान स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।

सावधानी ही है सुरक्षा

गंगा जैसे पवित्र और विशाल नदी तटों पर जाते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। विशेष रूप से किशोर और बच्चे पानी के पास जाते समय फिसलन और गहराई का अनुमान नहीं लगा पाते। इसलिए अभिभावकों और आयोजकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

हालांकि, परंपराएं और धार्मिक आस्था महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी उतना ही आवश्यक है। यदि आयोजन से पहले जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर ली जाए और निगरानी बढ़ाई जाए, तो ऐसे हादसों से बचा जा सकता है।

हरदोई गंगा घाट हादसा एक दुखद घटना है, जिसने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जहां एक ओर एक किशोरी की जान चली गई, वहीं एक किशोर की तलाश जारी है। प्रशासन राहत और खोज अभियान में जुटा है, जबकि गांव में शोक का माहौल है।

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