कानपुर: 1981 में पत्नी हत्या करने वाला पति किया गया गिरफ्तार, पढ़िए अब तक कहां था फरार

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: वर्ष 1981 के एक पुराने पत्नी हत्या मामले में फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी अपराधी को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। हरबंशमोहाल पुलिस ने आरोपी को उन्नाव से दबोचकर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

यह कार्रवाई वर्षों से लंबित एक पुराने मामले में पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। पुलिस लंबे समय से आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी और उस पर इनाम भी घोषित किया गया था।
1981 के मामले से शुरू हुई थी कहानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी अशोक कुमार जैन, जो कानपुर के हरबंशमोहाल क्षेत्र के लोकमन इलाके का निवासी है, पर वर्ष 1981 में अपनी पत्नी राधा की हत्या का आरोप लगा था। आरोप के अनुसार राधा की मृत्यु गला घोंटकर हुई थी, जिसके बाद ससुराल पक्ष की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था।

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि, लगभग 18 महीने बाद वह हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आ गया था।
न्यायालय का फैसला और लंबी सजा
इसके बाद मामले में सुनवाई जारी रही और बाद में न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

सूत्रों के अनुसार, अशोक जैन ने लगभग 25 वर्ष तक जेल में सजा काटी। लेकिन वर्ष 2023 में वह सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद फरार हो गया और अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने उसे फरार घोषित कर 25 हजार रुपये का इनाम रखा और लगातार उसकी तलाश शुरू की।
इस तरह से रही पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी की सफलता
लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को गुरुवार को सफलता मिली। पुलिस टीम ने आरोपी को उन्नाव जिले के थाना गंगाघाट क्षेत्र स्थित कप्तान के हाता से गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के बाद उसे शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी और कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई थी।
पूछताछ में सामने आए बयान
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी अशोक जैन ने अपने पक्ष में कई बातें कही। उसने दावा किया कि उसकी पत्नी राधा को संतान न होने के कारण मानसिक तनाव था और उसने आत्महत्या कर ली थी।

हालांकि, ससुराल पक्ष की शिकायत पर उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर उसे दोषी ठहराया गया। इसके अलावा आरोपी ने यह भी बताया कि उसकी दूसरी पत्नी रजनी दिव्यांग हैं और परिवार का खर्च वृद्धा पेंशन पर चलता है। उसने यह भी कहा कि उसे दूसरी शादी से भी कोई संतान नहीं है।
तकनीकी बदलाव पर आरोपी की टिप्पणी
आरोपी ने पूछताछ में यह भी कहा कि यदि 1981 में आज की तरह तकनीकी सुविधाएं जैसे सीसीटीवी और कॉल लोकेशन उपलब्ध होतीं, तो शायद स्थिति अलग होती।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय का निर्णय साक्ष्यों और कानून के आधार पर दिया गया था, और इस तरह के मामलों में जांच और गवाहों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस की लगातार जारी थी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, ऐसे पुराने मामलों में भी कानून अपना काम करता है और फरार आरोपियों को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाता। इस गिरफ्तारी को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और फरार अपराधियों को जल्द से जल्द न्याय के दायरे में लाया जाएगा।

कानपुर में 1981 के पुराने हत्या मामले में 25 हजार के इनामी आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि है। वर्षों से चल रहे इस मामले में कार्रवाई होने से यह संदेश भी गया है कि कानून से बचना संभव नहीं है, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो।



