लखनऊ: आयुष्मान योजना में सामने आई गड़बड़ी – 200 निजी अस्पतालों पर हुई कार्रवाई, 100 का रोका गया भुगतान

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लखनऊ: एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रशासनिक निर्णय सामने आया है। राज्य सरकार ने आयुष्मान भारत योजना में अनियमितताओं और मानकों के उल्लंघन को लेकर निजी अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत करीब 200 निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसा गया है, जबकि लगभग 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है और 100 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर की गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि योजना के तहत किसी भी प्रकार की लापरवाही या मानक उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
HEM 2.0 पोर्टल में लापरवाही पर हुई कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कई निजी अस्पतालों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर HEM 2.0 पोर्टल पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। इसके बावजूद उन्हें बार-बार अवसर दिया गया और ई-मेल, कॉल तथा बैठकों के माध्यम से सहयोग भी प्रदान किया गया।

हालांकि, इसके बाद भी कुछ अस्पतालों ने अनिवार्य मानकों का पालन नहीं किया, जिसके चलते यह सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत अस्पतालों ने सफलतापूर्वक HEM 2.0 पर माइग्रेशन पूरा कर लिया है, लेकिन शेष संस्थान मानकों पर खरे नहीं उतर सके।
35 अनिवार्य मानकों का किया गया था उल्लंघन
जांच में यह सामने आया कि कई अस्पतालों ने लगभग 35 अनिवार्य मानकों का पालन नहीं किया। इनमें फायर एनओसी (NOC), अस्पताल पंजीकरण, चिकित्सा योग्यताओं से संबंधित दस्तावेज, और इंफ्रास्ट्रक्चर मानक प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, कुछ अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं और गुणवत्ता मानकों में भी गंभीर कमियां पाई गईं। इन अनियमितताओं के आधार पर ही संबंधित अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है।
योगी सरकार का दिखा सख्त रुख
सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। ऐसे में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत दी जाने वाली सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए, नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
मरीजों के हित में उठाया गया है यह कदम
इस पूरे कदम को मरीजों के हित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी योजना के तहत दी जाती हैं, तो उनका मानक उच्च स्तर का होना आवश्यक है।

इस कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि निजी अस्पताल अधिक जिम्मेदारी के साथ योजना के नियमों का पालन करेंगे और मरीजों को बेहतर सेवाएं प्रदान करेंगे।
निगरानी व्यवस्था होगी और मजबूत
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। नियमित ऑडिट, डिजिटल मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।

कुल मिलाकर, आयुष्मान भारत योजना में अनियमितताओं पर की गई यह कार्रवाई राज्य सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है। जहां एक ओर 200 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।



