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कन्नौज: बिजली संकट से मक्का फसल हुई प्रभावित, किसानों ने किया प्रदर्शन; प्रशासन ने दिया आश्वासन

रिपोर्ट – श्याम सिंह 

कन्नौज: ऊर्जा मंत्री के गृह जनपद कन्नौज से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। गुगरापुर ब्लॉक सहित कई गांवों में भीषण बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या के कारण सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में किसानों की मक्का की फसल सूखने की खबरें सामने आई हैं।

स्थिति से नाराज किसानों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और बिजली आपूर्ति दुरुस्त कराने की मांग की। प्रशासन ने जल्द सुधार का आश्वासन दिया है, हालांकि किसान स्थायी समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।

सिंचाई हो गई है प्रभावित, फसल को हो रहा नुकसान

स्थानीय किसानों के अनुसार, पिछले कई दिनों से ग्रामीण फीडरों पर अनियमित बिजली आपूर्ति हो रही है। कई क्षेत्रों में पर्याप्त वोल्टेज न मिलने के कारण ट्यूबवेल और पंपसेट सुचारु रूप से नहीं चल पा रहे।

चूंकि मक्का की फसल इस समय सिंचाई पर निर्भर थी, इसलिए पानी की कमी से पौधे सूखने लगे। किसानों का कहना है कि हजारों बीघा क्षेत्र में खड़ी फसल प्रभावित हुई है। इससे पहले आलू की कीमतों में गिरावट से उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। अब मक्का की फसल पर संकट ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

किसानों ने किया प्रदर्शन

बढ़ती परेशानी के बीच कई किसान अपनी सूखी हुई मक्का की बालियां लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि यदि समय पर और पर्याप्त बिजली मिलती, तो फसल को बचाया जा सकता था। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है।

जानिए प्रशासन का पक्ष

जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि बिजली विभाग के साथ समन्वय कर आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।

साथ ही, संबंधित अधिकारियों को फीडरों की तकनीकी जांच करने और लो-वोल्टेज की समस्या का समाधान खोजने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि किसानों को राहत देने के लिए त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

बिजली संकट से पड़ा कृषि पर प्रभाव

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सिंचाई न मिलने से मक्का की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि फसल विकास के महत्वपूर्ण चरण में पानी की कमी हो जाए, तो उपज में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति कृषि उत्पादन की रीढ़ मानी जाती है। इसलिए, यदि बिजली व्यवस्था बाधित होती है, तो इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है।

ऊर्जा व्यवस्था पर उठे सवाल

कन्नौज ऊर्जा मंत्री का गृह जनपद होने के कारण यह मामला और अधिक चर्चा में है। हालांकि प्रशासन ने स्थिति सुधारने का भरोसा दिलाया है, लेकिन किसानों का कहना है कि स्थायी और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति ही दीर्घकालिक समाधान है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि ग्रामीण फीडरों के सुदृढ़ीकरण, ट्रांसफार्मर क्षमता बढ़ाने और लाइन लॉस कम करने जैसे उपायों पर गंभीरता से कार्य किया जाना चाहिए।

पढ़िए संभावित समाधान

1. फीडर सुधार और नियमित मॉनिटरिंग: ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत फीडरों की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत।
2. वोल्टेज स्थिरीकरण: लो-वोल्टेज की समस्या से निपटने के लिए तकनीकी उन्नयन।
3. वैकल्पिक सिंचाई साधन: सौर ऊर्जा आधारित पंपसेट को बढ़ावा देना।
4. फसल बीमा और राहत: प्रभावित किसानों को फसल बीमा योजना के तहत राहत प्रदान करना।

जानिए क्या है किसानों की अपेक्षा

किसानों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, तो वे अपनी फसल बचा सकते हैं और उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं।

इसके अलावा, उन्होंने फसल नुकसान के आकलन और मुआवजे की भी मांग की है।

कन्नौज के गुगरापुर ब्लॉक सहित कई ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट ने कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। मक्का की फसल को हुए नुकसान ने किसानों की आर्थिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

हालांकि प्रशासन ने स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया है, लेकिन आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिजली आपूर्ति कितनी जल्दी और प्रभावी रूप से बहाल होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करना न केवल कृषि उत्पादन के लिए, बल्कि समग्र ग्रामीण विकास के लिए भी आवश्यक है।

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