कानपुर: ऑटो में सवारी बनकर चोरी करने वाले चार आरोपी गिरफ्तार, 90% सामान बरामद

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: कमिश्नरेट पुलिस ने संगठित तरीके से चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार युवकों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी ऑटो में सवारी बनकर अकेले यात्रियों को निशाना बनाते थे और मौका मिलते ही उनके पास मौजूद नकदी व कीमती सामान चोरी कर लेते थे। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान चोरी का लगभग 90 प्रतिशत सामान भी बरामद कर लिया है।

यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। थाना फीलखाना पुलिस की दो टीमों ने संयुक्त रूप से तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय एक संगठित गिरोह पर प्रभावी अंकुश लगा है।
जानिए जांच कैसे आगे बढ़ी?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में शहर के विभिन्न इलाकों से ऑटो में चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों में एक समान तरीका सामने आया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि घटनाओं के पीछे एक ही गिरोह सक्रिय है। इसके बाद थाना फीलखाना की टीमों ने करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले।

इसके साथ ही सर्विलांस की मदद ली गई और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान ऑटो नंबर UP78JT8003 की पहचान हुई, जो कई घटनाओं में उपयोग किया गया था। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने गांधी भवन और के.ई.एम. हॉल के पास घेराबंदी कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पढ़िए कैसे करते थे वारदात?
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने चोरी की वारदात को अंजाम देने का तरीका भी स्वीकार किया है। दरअसल, गिरोह के तीन सदस्य पहले से ही ऑटो में सवारी बनकर बैठ जाते थे। इसके बाद चौथा सदस्य सड़क पर खड़े किसी अकेले यात्री को ऑटो में बैठने के लिए कहता था।

यात्री को आगे की सीट पर बैठाया जाता था। इसके बाद ऑटो को जानबूझकर तेज और लापरवाही से चलाया जाता था, जिससे यात्री असंतुलन से बचने के लिए दोनों हाथों से ऑटो को पकड़ लेता था। इसी दौरान पीछे बैठा एक साथी यात्री की जेब या बैग से नकदी और मोबाइल जैसे सामान निकाल लेता था।

इसके बाद आरोपी किसी बहाने—जैसे ऑटो खराब होना या रास्ता बदलना—का हवाला देकर यात्री को बीच रास्ते में उतार देते थे और मौके से फरार हो जाते थे। इस तरह वे बिना किसी सीधे टकराव के चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे।
किन क्षेत्रों में थे सक्रिय?
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह शहर के कई व्यस्त और प्रमुख इलाकों में सक्रिय था। इनमें जाजमऊ, मालरोड, घंटाघर, टाटमिल चौराहा, झकरकट्टी, रामादेवी, मूलगंज और परेड चौराहा शामिल हैं। चूंकि ये सभी क्षेत्र यातायात और भीड़भाड़ के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, इसलिए आरोपी आसानी से भीड़ में शामिल होकर निकल जाते थे।

हालांकि, लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने पैटर्न की पहचान की और सटीक रणनीति के साथ कार्रवाई की।
जानिए गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- मोहम्मद तालिब (20 वर्ष), निवासी पीपरखेड़ा, उन्नाव
- अल्ताफ खान (19 वर्ष), निवासी मीरपुर कैंट, कानपुर नगर
- मिराज खान उर्फ मुन्ना (20 वर्ष), निवासी सरैया बाजार, जाजमऊ, कानपुर नगर
- फहाद अली (27 वर्ष), निवासी रजवाखेड़ा, उन्नाव
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मोहम्मद तालिब और अल्ताफ खान के खिलाफ पहले से भी जाजमऊ थाने में आपराधिक मामले दर्ज हैं। अन्य आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।

क्या-क्या बरामद हुआ?
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद किया:
- 9,640 रुपये नकद
- दो मोबाइल फोन (रियलमी और मोटोरोला)
- वारदात में इस्तेमाल किया गया ऑटो (एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत सीज)

पुलिस के अनुसार, बरामद किया गया सामान हालिया घटनाओं से जुड़ा हुआ है। आगे की जांच में अन्य मामलों से भी कनेक्शन की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस का बयान
सहायक पुलिस अधीक्षक आशुतोष सिंह ने बताया कि यह गिरफ्तारी तकनीकी विश्लेषण और सतर्क निगरानी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कमिश्नरेट पुलिस संगठित अपराधों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है।

उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि यदि वे किसी संदिग्ध गतिविधि को देखें तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन में सफर करते समय अपने सामान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें।
नागरिकों के लिए सावधानी के सुझाव
इस घटना के मद्देनज़र पुलिस ने यात्रियों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
- ऑटो या अन्य सार्वजनिक वाहन में बैठते समय वाहन नंबर नोट कर लें।
- मोबाइल और नकदी को सुरक्षित स्थान पर रखें।
- यदि वाहन चालक संदिग्ध ढंग से वाहन चलाए, तो सतर्क रहें।
- आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क करें।

कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि तकनीकी साधनों और रणनीतिक जांच के माध्यम से संगठित अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। हालांकि, नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

कानपुर ऑटो चोरी गिरोह गिरफ्तार मामले में हुई यह सफलता न केवल पुलिस की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी और जन सहयोग आवश्यक है।

पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।



