कानपुर: बिधनू में स्मार्ट मीटर के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, हटाने की मांग पर सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: बिधनू ब्लॉक क्षेत्र से स्मार्ट मीटर को लेकर ग्रामीणों के विरोध का मामला सामने आया है। कानपुर के अंतर्गत आने वाले पतेहुरी गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने बर्रा स्थित दक्षिणांचल विद्युत केंद्र पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने स्मार्ट मीटर प्रणाली के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की और इसे लेकर बिजली विभाग के खिलाफ ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिलों में अनियमितता और बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। साथ ही, उनका यह भी आरोप है कि लगातार शिकायत करने के बावजूद विभागीय अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जानिए कैसे शुरू हुआ विरोध?
यह विरोध तब शुरू हुआ जब पतेहुरी गांव में कई घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए। इसके बाद ग्रामीणों ने दावा किया कि उनके बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आने लगे हैं।

धीरे-धीरे यह मुद्दा गांव में चर्चा का विषय बन गया और लोगों में असंतोष बढ़ता गया। इसके बाद दर्जनों ग्रामीण एकजुट होकर दक्षिणांचल विद्युत केंद्र, बर्रा पहुंचे और प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से बातचीत की मांग की।
प्रदर्शन का स्वरूप और ग्रामीणों की मांग
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी, लेकिन उनकी नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। ग्रामीणों ने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाला जा रहा है।

इसके अलावा, उनका कहना था कि पुराने मीटरों की तुलना में नए मीटरों की रीडिंग समझना मुश्किल है और बिलिंग प्रक्रिया पारदर्शी नहीं लगती। इसलिए उन्होंने मांग की कि या तो इन मीटरों की जांच की जाए या फिर इन्हें हटाकर पुराने सिस्टम को दोबारा लागू किया जाए।
ग्राम प्रधान की भूमिका
प्रदर्शन का नेतृत्व ग्राम प्रधान ने किया। उन्होंने मौके पर मौजूद बिजली विभाग के अधिकारियों से कड़ी बातचीत की और व्यवस्था पर सवाल उठाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि ग्रामीणों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर यह मुद्दा उच्च स्तर तक, यहां तक कि लखनऊ तक ले जाया जाएगा।

हालांकि, साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि उनकी मांगें पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से रखी जा रही हैं।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के अंत में ग्रामीणों ने एसडीओ को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्न मांगें शामिल थीं:
* स्मार्ट मीटर की जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
* बढ़े हुए बिजली बिलों की समीक्षा की जाए
* ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जाए
* पुराने मीटर प्रणाली पर पुनर्विचार किया जाए
* उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध निपटारा किया जाए

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेगा और जल्द उचित कार्रवाई करेगा।
बिजली विभाग की प्रतिक्रिया
दक्षिणांचल विद्युत केंद्र के अधिकारियों ने ग्रामीणों के ज्ञापन को स्वीकार कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि प्राप्त शिकायतों की जांच की जाएगी और तकनीकी टीम द्वारा मीटरों की रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया का विश्लेषण किया जाएगा।

इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर प्रणाली सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाना है। हालांकि, यदि किसी स्तर पर तकनीकी या व्यवहारिक समस्या पाई जाती है, तो उसका समाधान किया जाएगा।
स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ती बहस
स्मार्ट मीटर को लेकर कई क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे आधुनिक तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में कदम मानते हैं, जबकि कुछ उपभोक्ता बिलिंग और रीडिंग को लेकर असंतोष जता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकी बदलावों में जागरूकता की कमी अक्सर भ्रम पैदा करती है। इसलिए जरूरी है कि उपभोक्ताओं को समय-समय पर सही जानकारी दी जाए।
अब क्या होगी आगे की स्थिति
फिलहाल प्रशासन ने मामले को शांतिपूर्ण ढंग से संभाल लिया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि ग्रामीणों की समस्याओं की जांच की जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे।

साथ ही, विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले दिनों में गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा सकता है, ताकि स्मार्ट मीटर से जुड़ी गलतफहमियों को दूर किया जा सके।

कानपुर स्मार्ट मीटर विरोध प्रदर्शन बिधनू का यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि तकनीकी बदलाव के साथ संवाद और विश्वास का होना जरूरी है। ग्रामीणों की मांगें जहां एक ओर उनकी आर्थिक चिंता को दर्शाती हैं, वहीं प्रशासन के लिए यह एक अवसर है कि वह पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करे।

अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि बिजली विभाग इस पांच सूत्रीय ज्ञापन पर क्या ठोस कदम उठाता है और इस समस्या का समाधान किस प्रकार किया जाता है।



