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कानपुर: कब बुझेगा चकरपुर मंडी अग्निकांड का दर्द –  44 दुकानों में लगी थी आग – अब व्यापारियों ने उठाई यह मांग

रिपोर्ट – शुभम शर्मा 

कानपुर: महानगर स्थित चकरपुर मंडी के सब्जी खंड में हाल ही में हुए अग्निकांड के बाद प्रभावित व्यापारियों ने प्रशासन से राहत और पुनर्वास की मांग तेज कर दी है। 15 मई को कथित तौर पर शॉर्ट सर्किट से लगी आग में 44 दुकानें पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं। इस घटना से मंडी के आढ़ती व्यापारियों और वहां कार्यरत पल्लेदारों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है।

अब व्यापारियों ने जिलाधिकारी कानपुर महानगर को ज्ञापन सौंपकर मुआवजा, जली दुकानों के पुनर्निर्माण और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम ने मंडी परिसर की सुरक्षा व्यवस्थाओं और विद्युत प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानिए कैसे हुआ था अग्निकांड का हादसा

व्यापारियों के अनुसार, 15 मई की रात सब्जी खंड के चबूतरा संख्या-6 में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट की बताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते 44 दुकानें इसकी चपेट में आ गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि कई दुकानदारों को अपना सामान निकालने का अवसर भी नहीं मिला। स्थानीय लोगों और फायर ब्रिगेड की टीम ने मिलकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।

लाखों का हुआ है नुकसान

व्यापारियों का कहना है कि जली दुकानों में लाखों रुपये का फल-सब्जी का स्टॉक, तौल कांटे, फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान मौजूद था। इसके अतिरिक्त, कई दुकानदारों के दस्तावेज और व्यापार से जुड़े कागजात भी आग में नष्ट हो गए।

मंडी में कार्यरत पल्लेदार, जो अक्सर वहीं अस्थायी रूप से रहते हैं, उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ा। उनके निजी सामान भी आग की चपेट में आ गए। इस कारण न केवल आर्थिक, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी यह घटना गंभीर मानी जा रही है।

जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

अग्निकांड के बाद प्रभावित व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें उठाई गईं—

  1. तत्काल आर्थिक मुआवजा: व्यापारियों ने कहा कि नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन शीघ्र मुआवजा घोषित करे।
  2. दुकानों का पुनर्निर्माण: जली दुकानों का पुनर्निर्माण प्रशासनिक सहयोग से कराया जाए, ताकि व्यापारी दोबारा अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।
  3. सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाए: भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी अग्नि सुरक्षा प्रणाली स्थापित की जाए।

व्यापारियों ने यह भी मांग की कि मंडी परिसर में स्थायी रूप से फायर ब्रिगेड वाहन की तैनाती हो और बिजली के खंभों एवं तारों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।

विद्युत सुरक्षा पर उठाया सवाल

अग्निकांड के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका ने विद्युत व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मंडी परिसर में कई स्थानों पर खुले तार और पुराने खंभे देखे गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने पहले भी बिजली व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की थी।

हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान आना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजारों और मंडियों में नियमित विद्युत निरीक्षण और अग्नि सुरक्षा अभ्यास आवश्यक है।

यह रही प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है और संबंधित विभागों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि नुकसान का आकलन कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही, अग्निशमन विभाग से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यदि विद्युत लापरवाही या अन्य कारण सामने आते हैं, तो जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

व्यापार पर पड़े प्रभाव का भी जिक्र 

चकरपुर मंडी शहर की प्रमुख थोक सब्जी मंडियों में से एक है। यहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में फल और सब्जियों का कारोबार होता है। ऐसे में 44 दुकानों का प्रभावित होना आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल सकता है।

हालांकि, अन्य व्यापारियों ने अस्थायी रूप से व्यवस्था संभालने का प्रयास किया है, ताकि आम जनता को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता में बाधा न आए। फिर भी, प्रभावित दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

आखिर क्या हो सकती है भविष्य की दिशा

यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि बाजारों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा का अवसर भी है। यदि समय रहते सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ किया जाए, तो ऐसी घटनाओं की संभावना कम की जा सकती है।

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि—

  • प्रत्येक मंडी में अग्निशमन यंत्र अनिवार्य किए जाएं।
  • विद्युत वायरिंग की वार्षिक जांच हो।
  • आपातकालीन निकास मार्ग स्पष्ट और अवरोध मुक्त हों।
  • व्यापारियों को अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए।

चकरपुर मंडी अग्निकांड कानपुर के व्यापारिक समुदाय के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। 44 दुकानों के जलने से कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं कि राहत और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया कितनी शीघ्र शुरू होती है।

जहां एक ओर व्यापारी न्याय और सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह पारदर्शी जांच और त्वरित राहत के माध्यम से भरोसा कायम रखे। आगामी दिनों में प्रशासनिक निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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