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लखनऊ: शिया-सुन्नी चांद कमेटियों का ऐलान: जानिए कब मनाई जाएगी ईद-उल-अजहा, शुरू हुई तैयारियां

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

लखनऊ: शिया और सुन्नी दोनों चांद कमेटियों की संयुक्त बैठक के बाद ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष 28 मई को ईद-उल-अज़हा का त्योहार पूरे देश में धार्मिक उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। यह निर्णय चांद के दीदार न होने के बाद लिया गया है, जिसके चलते ज़िल हिज्जा महीने की शुरुआत 19 मई से मानी जाएगी।

इस घोषणा के साथ ही मुस्लिम समुदाय में त्योहार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है और लोग धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों में जुट गए हैं।

मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली और सैफ अब्बास ने किया ऐलान

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली और शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास ने संयुक्त रूप से यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि आसमान में ज़िल हिज्ज का चांद दिखाई नहीं दिया, जिसके कारण इस वर्ष 19 मई से ज़िल हिज्जा माह की शुरुआत मानी जाएगी।

मौलाना खालिद रशीद ने स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपराओं और चांद के दीदार के आधार पर ही त्योहारों की तिथि तय की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी समुदायों के बीच भाईचारे और सौहार्द को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

चांद के दीदार न होने के कारण तय हुई तारीख

चांद कमेटियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि चूंकि ज़िल हिज्ज का चांद इस बार नजर नहीं आया, इसलिए इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार माह की शुरुआत 19 मई से मानी जाएगी। इसके अनुसार, ईद-उल-अज़हा का त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा।

यह प्रक्रिया हर वर्ष चांद के दीदार पर आधारित होती है, जिससे इस्लामिक महीनों की शुरुआत और प्रमुख त्योहारों की तारीख तय की जाती है। इस बार भी परंपरा के अनुसार ही निर्णय लिया गया है।

बाजारों में बढ़ी रौनक, तैयारियां जोरों पर

ईद-उल-अजहा की घोषणा के बाद लखनऊ समेत आसपास के क्षेत्रों में बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। कपड़ों की दुकानों, किराना बाजारों और पशु बाजारों में लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है।

व्यापारी वर्ग भी इस अवसर को लेकर उत्साहित है क्योंकि बकरीद के मौके पर खरीदारी में तेजी आती है। लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए खरीदारी कर रहे हैं। साथ ही, कुर्बानी से जुड़े आवश्यक सामानों की भी मांग बढ़ने लगी है।

धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जाएगा त्योहार

ईद-उल-अज़हा इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे कुर्बानी के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार पशु की कुर्बानी करते हैं और उसका एक हिस्सा जरूरतमंदों में बांटते हैं।

मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि यह त्योहार केवल धार्मिक कर्तव्य ही नहीं बल्कि सामाजिक समानता और सेवा भावना का भी प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहार को शांति, अनुशासन और भाईचारे के साथ मनाएं।

प्रशासन और समाज में तैयारियां

त्योहार को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। साफ-सफाई, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

इसके साथ ही सामाजिक संगठनों ने भी लोगों से अपील की है कि वे पर्यावरण और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए कुर्बानी की प्रक्रिया को पूरा करें।

फिर मिलेगा भाईचारे और एकता का संदेश

इस घोषणा के साथ ही एक बार फिर यह संदेश दिया गया है कि सभी धार्मिक समुदायों को आपसी समझ और एकता के साथ त्योहार मनाने चाहिए। लखनऊ हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक रहा है, और इस बार भी यह परंपरा कायम रहने की उम्मीद है।

मौलाना खालिद रशीद और सैफ अब्बास दोनों ने मिलकर समाज से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें।

लखनऊ में शिया और सुन्नी चांद कमेटियों की संयुक्त घोषणा के बाद ईद-उल-अज़हा की तारीख तय हो चुकी है। 28 मई को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर पूरे शहर में उत्साह का माहौल है। बाजारों से लेकर धार्मिक स्थलों तक तैयारियां तेज हो गई हैं।

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