
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने आज राजधानी लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास 5-कालिदास मार्ग पर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जन-समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए।

राज्य सरकार की जनसुनवाई व्यवस्था के तहत आयोजित यह कार्यक्रम आम जनता और शासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्राथमिकता के साथ समाधान पर दिया जोर
जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लोगों ने भूमि विवाद, राजस्व संबंधी समस्याएं, पेंशन, आवास योजना, चिकित्सा सहायता, पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों और अन्य स्थानीय मुद्दों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक प्रकरण को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक समाधान भी सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे शिकायतकर्ताओं को की गई कार्रवाई की जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर बल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनता की समस्याएं सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में तत्काल कार्रवाई संभव है, वहां विलंब न किया जाए।

इसके अलावा, लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर उन्हें शीघ्र निपटाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य आम नागरिक को न्याय और राहत प्रदान करना है, ताकि लोगों का शासन पर विश्वास और मजबूत हो।
संवेदनशील मामलों में दिया जाएगा विशेष ध्यान
जनता दर्शन में कई ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें चिकित्सा सहायता, आर्थिक सहयोग या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित अनुरोध शामिल थे। मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर अनावश्यक देरी या लापरवाही पाई जाती है, तो उसके लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस प्रकार, सरकार की मंशा स्पष्ट है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
डिजिटल मॉनिटरिंग और फॉलो-अप व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जनता दर्शन में प्राप्त शिकायतों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाए। इसके माध्यम से प्रत्येक प्रकरण की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित की जा सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर भी इसी प्रकार की जनसुनवाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर ही अधिकतर समस्याओं का समाधान हो जाना चाहिए, ताकि लोगों को राजधानी तक न आना पड़े।
जनभागीदारी से सशक्त शासन
जनता दर्शन कार्यक्रम केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं है, बल्कि यह सरकार की जनभागीदारी आधारित कार्यशैली का भी प्रतीक है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का सहयोग और सुझाव शासन को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं को सही तथ्यों और आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करें, जिससे समाधान प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। साथ ही, उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार जनहित के मुद्दों पर पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है।
निरंतर जारी रहेगा जनता दर्शन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जनता दर्शन कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाता है, ताकि शासन और जनता के बीच संवाद बना रहे। इस पहल से आम नागरिकों को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दोबारा निर्देशित किया कि प्राप्त शिकायतों पर निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सुशासन का मूल मंत्र है—सुनवाई, संवेदनशीलता और समयबद्ध समाधान।

लखनऊ में आयोजित आज के जनता दर्शन कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह संदेश दिया कि सरकार आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। प्राथमिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

इस पहल से न केवल आम नागरिकों को राहत मिलती है, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति उनका विश्वास भी सुदृढ़ होता है।



