वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मणिपुरी रासलीला संग शास्त्रीय संगीत का हुआ भव्य आयोजन

रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी: सांस्कृतिक नगरी वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शास्त्रीय संगीत और मणिपुरी नृत्य पर आधारित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मणिपुर से आए कलाकारों और छात्रों ने अपनी पारंपरिक कला की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विश्वविद्यालय के मंच कला विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराना और उनमें रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा मणिपुरी कला शैली को नजदीक से समझने का अवसर प्राप्त किया।
सांस्कृतिक विविधता का दिखा जीवंत उदाहरण
कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्रीय संगीत की मधुर प्रस्तुतियों से हुई, जिसने वातावरण को सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया। इसके पश्चात मणिपुर से आए कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य शैली प्रस्तुत की। विशेष रूप से मणिपुर की प्रसिद्ध रासलीला नृत्य की प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही।

रासलीला की भाव-भंगिमाएं, पारंपरिक वेशभूषा और संगीत की लय ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया। विद्यार्थियों ने न केवल प्रस्तुति का आनंद लिया, बल्कि उसकी तकनीकी बारीकियों को भी समझने का प्रयास किया।
पढ़िए विभागाध्यक्ष का संदेश
मंच कला विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संगीता घोष ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समझ और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है।

उन्होंने आगे कहा कि जब छात्र विभिन्न परंपराओं से परिचित होते हैं, तब उनके दृष्टिकोण में व्यापकता आती है। परिणामस्वरूप, वे विविधता को सम्मान देने और समझने की क्षमता विकसित करते हैं।
मणिपुर के कलाकारों का रहा अनुभव
मणिपुर से आए कलाकारों और छात्रों ने बताया कि वाराणसी में प्रस्तुति देना उनके लिए एक विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि यह उनका यहां पहला कार्यक्रम था और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से मिली सराहना ने उन्हें अत्यंत प्रसन्न किया।

कलाकारों ने यह भी उल्लेख किया कि इस मंच ने उन्हें अपनी कला को नए दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान किया। साथ ही, उन्होंने वाराणसी की सांस्कृतिक परंपरा की प्रशंसा की और इसे भारत की आध्यात्मिक राजधानी बताया।
छात्रों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई विद्यार्थियों ने मणिपुरी नृत्य की शैली, उसकी ताल और भावों के बारे में प्रश्न पूछे।

इसके अतिरिक्त, कुछ छात्रों ने भविष्य में इस नृत्य शैली को सीखने की इच्छा भी व्यक्त की। इससे स्पष्ट है कि इस आयोजन ने छात्रों के भीतर सांस्कृतिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित किया।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्व
भारत विविधताओं का देश है, जहां प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्ट कला, भाषा और परंपराएं हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम राज्यों के बीच संवाद और समझ को मजबूत करते हैं।

यह आयोजन दो राज्यों—उत्तर प्रदेश और मणिपुर—के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता दिखाई दिया। इसके माध्यम से छात्रों ने यह अनुभव किया कि भिन्न परंपराओं के बावजूद भारतीय संस्कृति की मूल भावना एक है।
शिक्षा के साथ सांस्कृतिक विकास
आज के समय में शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है। बल्कि, विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल दिया जा रहा है। इसी क्रम में काशी विद्यापीठ मणिपुरी रासलीला कार्यक्रम जैसे आयोजन छात्रों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ सांस्कृतिक समृद्धि का अवसर भी प्रदान करते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से छात्रों में आत्मविश्वास, मंच कौशल और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है। साथ ही, वे परंपराओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता भी सीखते हैं।
आयोजन की सफलता
कार्यक्रम का समापन कलाकारों और आयोजकों के सम्मान के साथ हुआ। उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा व्यक्त की। इस प्रकार, यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक और यादगार अनुभव भी सिद्ध हुआ।

वाराणसी में आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम भारतीय विविधता और एकता का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मणिपुरी रासलीला और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति ने यह दर्शाया कि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद के भी महत्वपूर्ण मंच हैं।

भविष्य में ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को देश की समृद्ध परंपराओं से जुड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती रहेगी।



