
रिपोर्टर – वैभव गर्ग
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तेवरों से दुनिया को चौंका दिया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को कमर्शियल जहाजों के लिए खोलने के ऐलान के बावजूद, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) जारी रहेगी। ट्रंप का यह बयान ईरान की उस उम्मीद पर पानी फेरने जैसा है, जिसमें उसे आर्थिक राहत की तलाश थी।
“100% समझौता होने तक नहीं हटेंगे पीछे”
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईरान के संबंध में नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह से प्रभावी रहेगी। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा:
“यह नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान के साथ हमारा लेन-देन और समझौता 100% पूरा नहीं हो जाता।”
ट्रंप ने आगे संकेत दिए कि शांति समझौते की बातचीत अब और भी तेज होनी चाहिए, क्योंकि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
ईरान का बड़ा ऐलान: जहाजों के लिए खुला रास्ता
इससे पहले शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बड़ी घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि लेबनान और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम के मद्देनजर, ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी वाणिज्यिक जहाजों को गुजरने की अनुमति देगा। अराघची ने स्पष्ट किया था कि युद्धविराम की शेष अवधि के लिए यह मार्ग पूरी तरह खुला रहेगा।
पहले कहा ‘थैंक्यू’, फिर दिखाई सख्ती
रोचक बात यह है कि ईरान के इस फैसले पर पहले ट्रंप ने ‘थैंक्यू’ कहा था। उन्होंने पोस्ट किया था, “ईरान ने अभी घोषणा की है कि होर्मुज पूरी तरह खुला है। धन्यवाद!” लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना रुख कड़ा करते हुए स्पष्ट कर दिया कि ‘रास्ता खुलने’ का मतलब ‘नाकेबंदी हटना’ नहीं है।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिका की नाकेबंदी का सीधा असर ईरान के तेल निर्यात और वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है। ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि वह ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) की नीति को अंतिम समझौते तक बरकरार रखना चाहते हैं।



