
रिपोर्टर – मनीष अग्रवाल
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में एक ऐतिहासिक लेकिन नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा। इस बिल का उद्देश्य महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को 2029 के चुनावों से पहले लागू करना और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाना था।
वोटिंग का गणित: क्यों गिरा बिल?
संविधान संशोधन के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत अनिवार्य होता है।
- कुल मतदान: 528
- पक्ष में वोट: 298
- विपक्ष में वोट: 230
- जरूरी बहुमत: 352 वोट (2/3 हिस्सा)
- कमी: बिल पास होने के लिए सरकार को 54 और वोटों की जरूरत थी।
बिल के मुख्य प्रावधान क्या थे?
इस विधेयक के जरिए सरकार 2023 के महिला आरक्षण कानून में बदलाव करना चाहती थी:
- सीटों में वृद्धि: लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 (या कुछ प्रस्तावों के अनुसार 816) करना।
- जल्द लागू करना: जनगणना (Census) का इंतजार किए बिना परिसीमन प्रक्रिया शुरू करना ताकि 2029 में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल सके।
- परिसीमन का आधार: 2011 की जनगणना के आधार पर ही सीटों का दोबारा निर्धारण करना।
विपक्ष का विरोध और तर्क
कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के दलों ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे “अवैध और असंवैधानिक” करार देते हुए कहा कि यह महिलाओं के नाम पर देश के चुनावी नक्शे को बदलने की साजिश है। विपक्ष का मुख्य तर्क था कि बिना ताज़ा जनगणना के परिसीमन करना दक्षिण भारतीय और छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम कर देगा।
आगे क्या होगा?
बिल गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन को सूचित किया कि सरकार अब इससे जुड़े अन्य दो विधेयकों (परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन बिल) को भी आगे नहीं बढ़ाएगी।
महत्वपूर्ण तथ्य: हालांकि यह नया संशोधन (131वां) गिर गया है, लेकिन 2023 में पास हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संशोधन) अभी भी प्रभावी है। वह कानून अपनी मूल शर्तों (अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन) के आधार पर ही लागू होगा, जिसमें अब 2030 के बाद तक की देरी हो सकती है।




