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मुरादाबाद: डॉ. एसटी हसन ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर लिखावट को लेकर जताई नाराजगी, राजनीति का स्तर गिराना गलत

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन 

मुरादाबाद: पूर्व सपा सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लिखी गई आपत्तिजनक बातों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक्सप्रेसवे पर एक ऐसी लिखावट सामने आई, जिसमें मुस्लिमों को इस क्षेत्र में आने से मना किया गया था। डॉ. हसन ने इस घटना को राजनीति का गिरा हुआ स्तर बताते हुए नफरत फैलाने को गलत ठहराया और समाज में आपसी भाईचारे की अहमियत पर जोर दिया।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर आपत्तिजनक लिखावट –  डॉ. एसटी हसन

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हाल ही में एक आपत्तिजनक लिखावट देखी गई, जिसमें मुस्लिमों को इस मार्ग पर आने से मना किया गया था। यह बात तुरंत ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई। ऐसी लिखावट को लेकर मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे समाज में नफरत फैलाने वाली गतिविधि करार दिया। उनका कहना था कि हिंदू और मुसलमान इस देश की दो आंखें हैं और दोनों के बीच आपसी भाईचारा हमेशा बना रहेगा।

डॉ. एसटी हसन का बयान: ‘हिंदुस्तान किसी की जागीर नहीं’

डॉ. एसटी हसन ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुस्तान किसी की जागीर नहीं है, और न ही किसी को यहां आने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में हर धर्म, जाति और समुदाय का सम्मान किया जाता है और यह देश सबका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस देश के मुसलमान भी बराबरी के नागरिक हैं और उन्हें समाज में अपने अधिकारों का पूरा हक है।

मामले की गहरी जांच की आवश्यकता –  डॉ. एसटी हसन

डॉ. हसन ने इस मामले की गहराई से जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना था कि यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे केवल मीडिया या राजनीति के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा सुनिश्चित करनी चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं समाज में असंतोष और नफरत फैलाती हैं, जो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हो सकती हैं।

पढ़िए केरल से जुड़ी फिल्म पर डॉ. हसन का बयान

मुरादाबाद के पूर्व सांसद ने केरल से जुड़ी एक फिल्म पर भी टिप्पणी की, जिसमें कुछ विवादास्पद तत्व थे। उन्होंने कहा कि फिल्मों का उद्देश्य समाज को जोड़ना और उसके विकास में योगदान देना होता है, न कि नफरत फैलाना। डॉ. हसन ने फिल्म निर्माता से यह अपील की कि वे अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और एकता को बढ़ावा दें। उनका मानना था कि इस प्रकार की फिल्में केवल समाज को तोड़ने का काम करती हैं, जो देश की समृद्धि और शांति के लिए हानिकारक है।

यह है शंकराचार्य मामले पर डॉ. हसन का विचार

शंकराचार्य मामले में डॉ. हसन ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है। यदि किसी को गुमराह करके कार्रवाई की गई है, तो उसे सच्चाई सामने आनी चाहिए और इंसाफ मिलना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी धर्म, समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते समय पूरी सत्यता को सामने लाना आवश्यक है। डॉ. हसन ने इस मामले में भी एक निष्पक्ष और निष्कलंक जांच की आवश्यकता बताई।

राजनीति का स्तर और नफरत फैलाना –  डॉ. एसटी हसन

डॉ. एसटी हसन ने इस मामले के माध्यम से राजनीति के गिरते स्तर पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि राजनीति में नफरत फैलाना और समाज में बंटवारा करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। इसके बजाय, हमें समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति को हमेशा देश की भलाई और आम नागरिकों के हित में होना चाहिए, न कि विभाजन और नफरत के फैलाव के लिए।

विवादित मुद्दे को मिला गया नया मोड़ 

डॉ. एसटी हसन के बयान ने इस विवादित मुद्दे को एक नया मोड़ दिया है और समाज में भाईचारे और समानता का संदेश दिया है। उनका मानना था कि इस प्रकार की घटनाओं से देश की एकता को नुकसान पहुंच सकता है और हमें इसे रोकने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस मामले में जल्द कार्रवाई की अपील की और कहा कि यदि हमें एक समृद्ध और शांतिपूर्ण समाज बनाना है, तो नफरत फैलाने वाली गतिविधियों को सख्ती से रोकना होगा।

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