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लखनऊ: यूपी पुलिस की सोशल मीडिया रील्स पर सख्ती, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई – पढ़िए DGP का आदेश

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

लखनऊ से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिस कर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बनाई गई रील्स और पोस्ट्स के वायरल होने के बाद विभाग ने इसे अनुशासन और छवि से जुड़ा गंभीर विषय माना है। इसी क्रम में डीजीपी मुख्यालय की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 का पालन अनिवार्य

मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी “यूपी पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी 2023” का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। यदि कोई कर्मचारी आपत्तिजनक, अनुशासनहीन या विभाग की छवि को प्रभावित करने वाली पोस्ट या रील साझा करता है, तो उसे नियमों के तहत चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें वर्दीधारी पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या सरकारी परिसर में रील बनाते दिखाई दिए। हालांकि हर वीडियो नियमों का उल्लंघन नहीं था, फिर भी कुछ मामलों में अनुशासन और सेवा नियमों की अनदेखी सामने आई। इसलिए, विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवा आचरण नियम सर्वोपरि हैं।

आपत्तिजनक पोस्ट और रील्स पर होगी निगरानी

आदेश के अनुसार, पुलिसकर्मियों द्वारा साझा की जाने वाली सामग्री पर नियमित निगरानी रखी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ऐसे मामलों में संबंधित पोस्ट या वीडियो का URL सुरक्षित रखने और रिकॉर्ड संधारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और प्रमाण आधारित हो।

अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में सोशल मीडिया पॉलिसी के उल्लंघन से जुड़े मामलों की मासिक रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजें। इससे न केवल निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

विभागीय कार्रवाई की चेतावनी

अमिताभ यश, जो वर्तमान में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पॉलिसी तोड़ने वालों के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि सोशल मीडिया पर अनुशासनहीनता से न केवल विभाग की छवि प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी कमजोर पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस सेवा एक जिम्मेदार पद है और समाज में उसकी विशेष भूमिका होती है। इसलिए, हर पुलिसकर्मी को यह समझना होगा कि उसकी सार्वजनिक गतिविधियां विभाग की साख से सीधे जुड़ी होती हैं।

छवि और विश्वास का है सवाल

पुलिस विभाग आम जनता के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रमुख स्तंभ है। ऐसे में यदि सोशल मीडिया पर अनुचित सामग्री सामने आती है, तो उससे संस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि मुख्यालय ने इस विषय को केवल अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत छवि का प्रश्न माना है।

हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सकारात्मक और जनहित से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई पुलिसकर्मी सामुदायिक कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान या सामाजिक कार्यों से संबंधित जानकारी साझा करता है और वह सेवा नियमों के अनुरूप है, तो उसे गलत नहीं माना जाएगा।

डिजिटल युग में नई चुनौतियां

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच सरकारी कर्मचारियों के लिए संतुलन बनाए रखना एक चुनौती बन गया है। एक ओर सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम है, वहीं दूसरी ओर सेवा नियमों की सीमाएं भी हैं। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 तैयार की गई थी।

अब, मुख्यालय के ताजा निर्देशों के बाद यह साफ हो गया है कि पॉलिसी को केवल औपचारिक दस्तावेज न मानकर व्यवहारिक रूप से लागू किया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, आने वाले समय में सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों की गतिविधियों में अधिक सावधानी देखने को मिल सकती है।

मासिक रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू

मुख्यालय ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रत्येक जनपद से सोशल मीडिया पॉलिसी उल्लंघन से संबंधित मामलों की मासिक रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजी जाए। इससे विभागीय स्तर पर डेटा संकलन और विश्लेषण संभव होगा। साथ ही, यह भी देखा जा सकेगा कि किन क्षेत्रों में जागरूकता की आवश्यकता अधिक है।

इसके अतिरिक्त, संबंधित अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे समय-समय पर अधीनस्थ कर्मियों को सोशल मीडिया पॉलिसी के प्रावधानों से अवगत कराएं। इससे अनजाने में होने वाले उल्लंघनों को भी रोका जा सकेगा।

अनुशासन और पारदर्शिता पर दिया गया जोर

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि यूपी पुलिस मुख्यालय अनुशासन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। विभाग का मानना है कि सोशल मीडिया का जिम्मेदार उपयोग ही संस्थागत छवि को सुदृढ़ कर सकता है।

अंततः, यह कदम पुलिस बल के भीतर जवाबदेही की भावना को मजबूत करेगा। साथ ही, जनता के बीच यह संदेश भी जाएगा कि विभाग स्वयं के आचरण को लेकर सजग और प्रतिबद्ध है।

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